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चित्तौड़गढ़

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चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ दुर्ग भारत का सबसे विशाल दुर्ग है। यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है जो भीलवाड़ा से कुछ किमी दक्षिण में है। यह एक विश्व विरासत स्थल है। चित्तौड़गढ़ 1568 तक मेवाड़ की राजधानी थी, और उसके बाद उदयपुर को मेवाड़ की राजधानी बना दिया गया। इस किले की इसकी स्थापना सिसोदिया वंश के शासक बप्पा रावल ने की थी। चित्तौड़गढ़ का इतिहास इस किले की तरह ही हजारों साल पुराना माना जाता है। उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक चित्तौड़गढ़ का किला राजपूतों के साहस, शौर्य, त्याग, बलिदान और बड़प्पन का प्रतीक है। चित्तौड़गढ़ का यह किला राजपूत शासकों की वीरता, उनकी महिमा एवं शक्तिशाली महिलाओं के अद्धितीय और अदम्य साहस की कई कहानियों को प्रदर्शित करता है। चित्तौड़गढ़ दुर्ग इस दुर्ग का निर्माण 7वीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य के द्वारा करवाया गया । चित्तौड़गढ़ दुर्ग राज्य का सबसे प्राचीनतम दुर्ग है । इस दुर्ग को चित्रकूट नामक पहाडी पर बनाया गया है । यह राज्य का दक्षिणी-पूर्वी द्वार है । इस के बारे में कहा जाता है कि "गढ तो चित्तौड़गढ़ बाकी सब गढैया ।" राजस्थान क...

रामेश्वरम मंदिर

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रामेश्वरम मंदिर का इतिहास Rameshwaram live location माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने श्रीलंका से लौटते समय देवों के देव महादेव (Lord Shiva) की इसी स्थान पर पूजा की थी। इन्हीं के नाम पर रामेश्वर मंदिर और रामेश्वर द्वीप का नाम पड़ा। ऐसी मान्यता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम अपनी पत्नी देवी सीता के साथ रामेश्वरम के तट पर कदम रखकर ही भारत लौटे थी। एक ब्राह्मण को मारने के दोष को खत्म करने के लिए भगवान राम शिव की पूजा करना चाहते थे। चूंकि द्वीप में कोई मंदिर नहीं था, इसलिए भगवान शिव की मूर्ति लाने के लिए श्री हनुमान को कैलाश पर्वत भेजा गया था। जब हनुमान समय पर शिवलिंग लेकर नहीं पहुंचे तब देवी सीता ने समुद्र की रेत को मुट्ठी में बांधकर शिवलिंग बनाया और भगवान राम ने उसी शिवलिंग की पूजा की।बाद में हनुमान द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी वहीं स्थापित कर दिया  इसके बाद 15वीं शताब्दी में राजा उडैयान सेतुपति एवं नागूर निवासी वैश्य ने 1450 ई. में इसके 78 फीट ऊंचे गोपुरम का निर्माण करवाया था। फिर सोलहवीं शताब्दी में मंदिर के दक्षिणी में दूसरे हिस्से की दीवार का निर्माण तिरुमलय सेतुपति ने कराय...

केदारनाथ मंदिर

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 आज हम केदारनाथ मंदिर का इतिहास (Kedarnath Temple History In Hindi) Kedarnath temple Live Location केदारनाथ मंदिर जहाँ स्थित है, वहां की चढ़ाई बहुत ही कठिन है । हालाँकि आज के समय में भारत सरकार ने कई तरह की सुविधाएँ प्रदान की हुई है लेकिन पहले ऐसा नहीं था। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि केदारनाथ जहाँ स्थित है, वहां इतने बड़े-बड़े पत्थर कैसे ले जाए गए और मंदिर का निर्माण आखिरकार संभव कैसे हुआ? इसके लिए आज हम आपके सामने केदारनाथ मंदिर की कहानी (Kedarnath Temple Story In Hindi) को रखेंगे । यह कहानी पांडवों से जुड़ी हुई है जिसकी शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद से होती है। कहने का अर्थ यह हुआ कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था और पांडव हस्तिनापुर के महाराज बन चुके थे, उसके बाद केदारनाथ मंदिर के इतिहास की शुरुआत हुई थी महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों का पश्चाताप कुरुक्षेत्र की भूमि पर 18 दिनों तक लड़े गए महाभारत के भीषण युद्ध के बारे में भला कौन नही जानता। इस युद्ध में सभी रिश्तों की बलि चढ़ गयी थी फिर चाहे वह गुरु-शिष्य का रिश्ता हो या भाई-भाई का या चाचा-भतीजे का। 18 दिनों तक निरंतर कुरुक्षेत्...

ताजमहल The Taj Mahal

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भारत की शान एवं प्रेम का प्रतीक ताजमहल Live Location from Taj Mahal मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी कुशल रणनीति के चलते 1628 ईसवी से 1658 ईसवी तक भारत पर शासन किया था। शाहजहां स्थापत्य कला और वास्तुकला का गूढ़प्रेमी था, इसलिए उसने अपने शासनकाल में कई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण करवाया था, जिसमें से ताजमहल उनकी सबसे प्रसिद्ध इमारत है, जिसकी खूबसूरती के चर्चे पूरी दुनियाभर में हैं। ताजमहल दुनिया की सबसे मशहूर ऐतिहासिक इमारतों में से एक  है। मुगल शासक शाहजहां ने अपनी सबसे चहेती बेगम मुमताज महल की मौत के बाद उनकी याद में 1632 ईसवी में इसका निर्माण काम शुरु करवाया था। आपको बता दें कि ताजमहल, मुमताज महल का एक विशाल मकबरा है, इसलिए इसे ”मुमताज का मकबरा” भी कहते हैं। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने प्रेम को हमेशा अमर रखने के लिए ताजमहल का निर्माण करवाया था।

भानगढ़ किले की कहानी

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भानगढ़ किले की कहानी   भानगढ़ किले की live location सदियों पुराना है राजस्थान में 17 वीं शताब्दी में बना हुआ प्राचीन कला का एक नमूना मन जाता है आमेर के राजा भगवंतदास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए 1573 ई. में बनवाया था जो की राजा सवाई मानसिंह के छोटे भाई थे 1613 ई. में माधो सिंह ने भानगढ़ किले का अपना निवास स्थान बना लिया था माधो सिंह के शासन के बाद उन के बेटे छत्र सिंह ने वहाँ शासन किया उस के बाद 1722 ई. में इसी वंश के राजा हरीसिंह ने यह की गदी समाली उसी के साथ किले किले की चमक धीरे-धीरे कम होने लगी छत्र सिंह के बेटे राजा अजब सिंह ने अपने किले  भानगढ़ किले  के समीप ही एक अजबगड़ किले का निर्माण किया और एह निवास करने लगे. भानगढ़ किले की कहानी भानगढ़ किले के उजाड़ होने के पीछे एक श्राप माना जाता है जो कि एक साधु ने दिया था भानगढ़ किले का निर्माण माधो सिंह ने वहाँ रहने वाले एक तपस्वी की अनुमति लेकर बनवाए थे लेकिन तपस्वी एक शर्त पर राजी हुआ थे की किले की अशुब छाया उनके पवित्र निवास स्थान पर नही पड़नी चाहिए वरना यह किला देर में बदल जायेगा. ...

बीसलपुर बाँध

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बीसलपुर बाँध बीसलपुर बाँध (Bisalpur Dam) भारत के राजस्थान राज्य के टोंक ज़िले में बनास नदी पर खड़ा एक गुरुत्व बाँध है। इसका निर्माण सन् 1999 में पूर्ण हुआ था और इसका प्रयोग सिंचाई व जल प्रबन्धन के लिए होता है। Location Live Bisalpur Dam बीसलदेव मन्दिर बीसलदेव मन्दिर-भारत के राजस्थान राज्य के टोंक ज़िले के बीसलपुर ग्राम में स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। यह भगवान शिव के गोकर्णेश्वर रूप को समर्पित है। यह मन्दिर बनास नदी पर बने बीसलपुर बाँध के जलाशय के किनारे स्थित है। यह भारत के राष्ट्रीय महत्व के स्थापत्य की सूची में सम्मिलित है और इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में चौहान वंश के विग्रहराज चौहान (विग्रहराज चतुर्थ) ने करवाया था, जो बीसल देव के नाम से भी जाने जाते हैं.. Bisalpur dem beautiful photo

अल्बर्ट हॉल संग्रहाल

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अल्बर्ट हॉल संग्रहालय राजस्थान की शाही विरासत के लिए एक जीवंत प्रमाण के रूप में कार्य करता है, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय राजस्थान  Live Location जयपुर, एक शहर जो अपनी जीवंत संस्कृति और ऐतिहासिक खजानों के लिए प्रसिद्ध है, एक आकर्षण का दावा करता है जो राजस्थान के शाही अतीत के लिए एक टाइम कैप्सूल के रूप में कार्य करता है। 1876 ​​में बना अल्बर्ट हॉल संग्रहालय इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत का प्रमाण है। विशाल राम निवास गार्डन के भीतर स्थित, यह संग्रहालय 16 एकड़ में फैला है और इसे प्रतिष्ठित वास्तुकार सर सैमुअल स्विंटन जैकब द्वारा डिजाइन किया गया था। इसका निर्माण वेल्स के राजकुमार अल्बर्ट एडवर्ड की भारत यात्रा की स्मृति में किया गया था। जटिल समरूपता की विशेषता वाला संग्रहालय का वास्तुशिल्प चमत्कार, इंडो-सारसेनिक और यूरोपीय शैलियों का मिश्रण है, जो आगंतुकों को आश्चर्यचकित कर देता है। हालाँकि, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय का असली सार इसकी दीवारों के भीतर है। यह संग्रहालय राजस्थानी संस्कृति, इतिहास और विरासत का खजाना है। 16 दीर्घाओं में विभाजित, यह अतीत की एक आकर्षक यात्रा प्रस्त...