चित्तौड़गढ़
चित्तौड़गढ़
चित्तौड़गढ़ दुर्ग भारत का सबसे विशाल दुर्ग है। यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है जो भीलवाड़ा से कुछ किमी दक्षिण में है। यह एक विश्व विरासत स्थल है। चित्तौड़गढ़ 1568 तक मेवाड़ की राजधानी थी, और उसके बाद उदयपुर को मेवाड़ की राजधानी बना दिया गया। इस किले की इसकी स्थापना सिसोदिया वंश के शासक बप्पा रावल ने की थी। चित्तौड़गढ़ का इतिहास इस किले की तरह ही हजारों साल पुराना माना जाता है।
उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक चित्तौड़गढ़ का किला राजपूतों के साहस, शौर्य, त्याग, बलिदान और बड़प्पन का प्रतीक है। चित्तौड़गढ़ का यह किला राजपूत शासकों की वीरता, उनकी महिमा एवं शक्तिशाली महिलाओं के अद्धितीय और अदम्य साहस की कई कहानियों को प्रदर्शित करता है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग इस दुर्ग का निर्माण 7वीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य के द्वारा करवाया गया । चित्तौड़गढ़ दुर्ग राज्य का सबसे प्राचीनतम दुर्ग है । इस दुर्ग को चित्रकूट नामक पहाडी पर बनाया गया है । यह राज्य का दक्षिणी-पूर्वी द्वार है । इस के बारे में कहा जाता है कि "गढ तो चित्तौड़गढ़ बाकी सब गढैया ।"
राजस्थान के मेवाड़ में गुहिल राजवंश के संस्थापक बप्पा रावल ने अपनी अदम्य शक्ति और साहस से मौर्य सम्राज्य के मौर्य वंश के अंतिम शासक मानमोरी को युद्ध में हराकर करीब 8वीं शताब्दी में चित्तौड़गढ़ पर अपना अधिकार कर लिया और करीब 724 ईसवी में भारत के इस विशाल और महत्वपूर्ण दुर्ग चित्तौड़गढ़ किले की 724 ईसवी में स्थापना की।
चित्तौड़गढ़ का किला भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक किलो में से एक हैं, और उससे भी कहीं ज्यादा रोमांचक है इस किले का इतिहास। चित्तौड़गढ़ का किला राजस्थान के 5 पहाड़ी किलों में से एक है,
निर्माण
आठवीं सदी में चित्रांगद मौर्य मेवाड़ शासक ना कि मौर्य शासक द्वारा बनवाया गया बाद में इस पर अधिकांश निर्माण में आधुनिकरण कुंभा ने करवाया चार दिवारी, सात द्वार, विजय स्तंभ, कुंभ, स्वामी मंदिर, कुंभा के महल का मंदिर
चित्तौड़गढ़ का किला 180 मीटर की ऊंची पहाड़ी पर बना, यह किला 700 एकड़ में फैला हुआ है। यह विशाल किला अपनी भव्यता, आर्कषण और सौंदर्य की वजह से साल 2013 में यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया, और यहा हजारों की संख्या में पर्यटक चित्तौड़गढ़ के किले को देखने के लिए आते हैं।
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