भानगढ़ किले की कहानी

भानगढ़ किले की कहानी  

भानगढ़ किले की live location

सदियों पुराना है राजस्थान में 17 वीं शताब्दी में बना हुआ प्राचीन कला का एक नमूना मन जाता है आमेर के राजा भगवंतदास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए 1573 ई. में बनवाया था जो की राजा सवाई मानसिंह के छोटे भाई थे 1613 ई. में माधो सिंह ने भानगढ़ किले का अपना निवास स्थान बना लिया था माधो सिंह के शासन के बाद उन के बेटे छत्र सिंह ने वहाँ शासन किया उस के बाद 1722 ई. में इसी वंश के राजा हरीसिंह ने यह की गदी समाली उसी के साथ किले किले की चमक धीरे-धीरे कम होने लगी छत्र सिंह के बेटे राजा अजब सिंह ने अपने किले  भानगढ़ किले  के समीप ही एक अजबगड़ किले का निर्माण किया और एह निवास करने लगे.

भानगढ़ किले की कहानी

भानगढ़ किले के उजाड़ होने के पीछे एक श्राप माना जाता है जो कि एक साधु ने दिया था भानगढ़ किले का निर्माण माधो सिंह ने वहाँ रहने वाले एक तपस्वी की अनुमति लेकर बनवाए थे लेकिन तपस्वी एक शर्त पर राजी हुआ थे की किले की अशुब छाया उनके पवित्र निवास स्थान पर नही पड़नी चाहिए वरना यह किला देर में बदल जायेगा.

 लेकिन माधो सिंह के एक महत्वाकाशी उत्तराधिकारीयों में से एक ने किले को ज्यादा ऊपर बढ़ा दिया और किले की अशुभ छाया तपस्वी के घर तक पहुंच गई और यह भानगढ़ का किला खंडार में बदल गया और वहां कोई ना बचा और यह भानगढ़ का किला भूतिया बन गया.  

भानगढ़ किले का रहस्य

भानगढ़ किले के उजाड़ होने के पीछे एक और कहानी बताई जाती है जो की भीत ही अजीब है इसके पीछे एक तांत्रिक का श्राप माना जाता है जिस की वजह से ये भानगढ़ किले भूतो का किला बन गया चलीये अब आप को पूरी कहानी बताते है ऐसा माना  जाता है कि भानगढ़ किले में रत्नावती नाम की एक बहुत ही सुन्दर राजकुमारी रहती थी उस समय राजकुमारी की सुन्दरता पुरे राज्य में थी यह खबर वहाँ रहने वाले एक तांत्रिक को पड़ी तो वे राजकुमारी को दखने चला आया जब तांत्रिक ने राजकुमारी को देखा तो वह भी राजकुमारी के प्यार में पड़ गया.

और उसे पाने की योजना बनाने लगा तभी उसे पता लगा की महल की दासी राजकुमारी के लिए इत्र लेने आई है तो तांत्रिक ने राजकुमारी को जादू की मदद से वश में करने का सोचा और इत्र में जादू कर दिया इस बात की खबर राजकुमारी को लगी तो तांत्रिक को मृत्युदंड की सजा दी गई और उसे कुचलवा दिया गया लेकिन तांत्रिक में आखिरी सांस लेने से पहले श्राप दिया की यह किला और इसमें रहने वाले लोग भी नहीं बचेंगे सब मारे जाएंगे और उनको मोक्ष भी नहीं मिलेगा उनकी आत्मा यही भटकती रहेगी ओए आज 21 वी शताब्दी में रहने वाले लोग इस बात से भय भीत रहते है की भानगढ़ किले में बहुत रहते है.


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

श्री सांवलिया सेठ मंदिर की सुंदर कथा

कुम्भलगढ़ किला का इतिहास

गोविंद देवजी का मंदिर