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बीसलपुर बाँध

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बीसलपुर बाँध बीसलपुर बाँध (Bisalpur Dam) भारत के राजस्थान राज्य के टोंक ज़िले में बनास नदी पर खड़ा एक गुरुत्व बाँध है। इसका निर्माण सन् 1999 में पूर्ण हुआ था और इसका प्रयोग सिंचाई व जल प्रबन्धन के लिए होता है। Location Live Bisalpur Dam बीसलदेव मन्दिर बीसलदेव मन्दिर-भारत के राजस्थान राज्य के टोंक ज़िले के बीसलपुर ग्राम में स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। यह भगवान शिव के गोकर्णेश्वर रूप को समर्पित है। यह मन्दिर बनास नदी पर बने बीसलपुर बाँध के जलाशय के किनारे स्थित है। यह भारत के राष्ट्रीय महत्व के स्थापत्य की सूची में सम्मिलित है और इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में चौहान वंश के विग्रहराज चौहान (विग्रहराज चतुर्थ) ने करवाया था, जो बीसल देव के नाम से भी जाने जाते हैं.. Bisalpur dem beautiful photo

अल्बर्ट हॉल संग्रहाल

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अल्बर्ट हॉल संग्रहालय राजस्थान की शाही विरासत के लिए एक जीवंत प्रमाण के रूप में कार्य करता है, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय राजस्थान  Live Location जयपुर, एक शहर जो अपनी जीवंत संस्कृति और ऐतिहासिक खजानों के लिए प्रसिद्ध है, एक आकर्षण का दावा करता है जो राजस्थान के शाही अतीत के लिए एक टाइम कैप्सूल के रूप में कार्य करता है। 1876 ​​में बना अल्बर्ट हॉल संग्रहालय इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत का प्रमाण है। विशाल राम निवास गार्डन के भीतर स्थित, यह संग्रहालय 16 एकड़ में फैला है और इसे प्रतिष्ठित वास्तुकार सर सैमुअल स्विंटन जैकब द्वारा डिजाइन किया गया था। इसका निर्माण वेल्स के राजकुमार अल्बर्ट एडवर्ड की भारत यात्रा की स्मृति में किया गया था। जटिल समरूपता की विशेषता वाला संग्रहालय का वास्तुशिल्प चमत्कार, इंडो-सारसेनिक और यूरोपीय शैलियों का मिश्रण है, जो आगंतुकों को आश्चर्यचकित कर देता है। हालाँकि, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय का असली सार इसकी दीवारों के भीतर है। यह संग्रहालय राजस्थानी संस्कृति, इतिहास और विरासत का खजाना है। 16 दीर्घाओं में विभाजित, यह अतीत की एक आकर्षक यात्रा प्रस्त...

खाटू श्याम कथा (Khatu Shyam Katha)

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खाटू श्याम कथा महाभारत काल में लगभग साढ़े पांच हज़ार वर्ष पहले एक महान आत्मा का अवतरण हुआ जिसे हम भीम पौत्र बर्बरीक के नाम से जानते हैं महीसागर संगम स्थित गुप्त क्षेत्र में नवदुर्गाओं की सात्विक और निष्काम तपस्या कर बर्बरीक ने दिव्य बल और तीन तीर व धनुष प्राप्त किए। कुछ वर्ष उपरांत कुरुक्षेत्र में उपलब्ध नामक स्थान पर युद्ध के लिए कौरव और पांडवों की सेनाएं एकत्रित हुई। युद्ध का शंखनाद होने ही वाला था कि यह वृतांत बर्बरीक को ज्ञात हुआ और उन्होंने माता का आशीर्वाद ले युद्धभूमि की तरफ प्रस्थान किया। उनका इरादा था कि युद्ध में जो भी हारेगा उसकी सहायता करूंगा। भगवान श्री कृष्ण को जब यह वृतांत ज्ञात हुआ तो उन्होंने सोचा कि ऐसी स्थिति में युद्ध कभी समाप्त नहीं होने वाला। अतः उन्होंने ब्राह्मण का वेश धारण कर बर्बरीक का मार्ग रोककर उनसे पूछा कि आप कहां प्रस्थान कर रहे हैं। बर्बरीक ने अपना ध्येय बताया कि वह कुरुक्षेत्र जाकर अपना कर्तव्य निर्वाह करेंगे और इस पर ब्राह्मण रूप में श्री कृष्ण ने उन्हें अपना कौशल दिखाने को कहा। बर्बरीक ने एक ही तीर से पेड़ के सभी पत्तों को भेद दिया सिवाय एक पत्ते के ज...

श्री सांवलिया सेठ मंदिर की सुंदर कथा

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भगवान श्री सांवलिया सेठ का संबंध मीरा बाई से बताया जाता है। किवदंतियों के अनुसार सांवलिया सेठ मीरा बाई के वही गिरधर गोपाल है जिनकी वह पूजा किया करती थी। मीरा बाई संत महात्माओं की जमात में इन मूर्तियों के साथ भ्रमणशील रहती थी। ऐसी ही एक दयाराम नामक संत की जमात थी जिनके पास ये मूर्तियां थी।   एक बार जब औरंगजेब की मुग़ल सेना मंदिरों को तोड़ रही थी। मेवाड़ राज्य में पंहुचने पर मुग़ल सैनिकों को इन मूर्तियों के बारे में पता लगा। तब संत दयाराम जी ने प्रभु प्रेरणा से इन मूर्तियों को बागुंड-भादसौड़ा की छापर (खुला मैदान) में एक वट-वृक्ष के नीचे गड्ढा खोद कर पधरा दिया और फिर समय बीतने के साथ संत दयाराम जी का देवलोकगमन हो गया।     कालान्तर में सन 1840 में  मंडफिया ग्राम निवासी भोलाराम गुर्जर नाम के ग्वाले को एक सपना आया कि भादसोड़ा-बागूंड के छापर में 4 मूर्तियां  ज़मीन में दबी हुई है, जब उस जगह पर खुदाई की गई तो भोलाराम का सपना सही निकला और वहां से एक जैसी 4 मूर्तियां प्रकट हुईं। सभी मूर्तियां  बहुत ही मनोहारी थी।   देखते ही देखते ये ख...

हवा महल (Hawa Mahal)

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हवा महल हवा महल  भारतीय राज्य  राजस्थान  की राजधानी  जयपुर  में एक राजसी-महल है। इसे सन 1799 में राजस्थान जयपुर बड़ी चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन के पास  महाराजा   सवाई प्रताप सिंह  ने बनवाया था और इसे किसी 'राजमुकुट' की तरह वास्तुकार  लाल चंद उस्ताद  द्वारा डिजाइन किया गया था। इसकी अद्वितीय पाँच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें 953 बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें  झरोखा  कहते हैं। इन खिडकियों को जालीदार बनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि बिना किसी की निगाह पड़े "पर्दा प्रथा" का सख्ती से पालन करतीं राजघराने की महिलायें इन खिडकियों से महल के नीचे सडकों के समारोह व गलियारों में होने वाली रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों का अवलोकन कर सकें। इसके अतिरिक्त, " वेंचुरी प्रभाव " के कारण इन जटिल संरचना वाले जालीदार झरोखों से सदा ठण्डी हवा, महल के भीतर आती रहती है, जिसके कारण तेज गर्मी में भी महल सदा वातानुकूलित सा ही रहता है। ...

बिरला मंदिर (Birla Mandir)

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बिरला मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित बिरला मंदिर, मोती डूंगरी किले के समीप स्थित है। प्रारंभ में यह लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से प्रचलित था। शुद्ध सफेद संगमरमर से बना बिरला मंदिर परंपरागत प्राचीन हिन्दु मंदिरों से विपरीत, एक आधुनिक दृष्टिकोण के साथ बनाया गया था। मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी व अन्य देवी-देवताओं की, संगमरमर के पत्थर से तराशी गई सुंदर मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह मंदिर अपनी बारीक नक्काशी के काम के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर खुदे धार्मिक चिन्हों, पौराणिक घटनाओं, गीता के श्लोक और उपनिषद इस मंदिर की सुंदरता में चार-चांद लगाते हैं। हिन्दु देवी-देवताओं की मूर्तियों के अलावा इस मंदिर में कई महान संतों व गौतम बुद्ध की तस्वीरें भी रखी गई हैं। इस मंदिर के चारों ओर हरा-भरा उद्यान और परिसर में एक छोटा सा संग्रहालय भी स्थित है। बिरला मंदिर का इतिहास ऐसा माना जाता है कि सन् 1904 में भगवान लक्ष्मी नारायण के भक्त संत रामानुज दास ने यहाँ एक मंदिर का निर्माण करवाया था जिसके स्थान पर आज यह विशाल बिरला मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि संत राम...

गलताजी

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गलताजी गलताजी ,  जयपुर ,  राजस्थान  स्थित एक प्राचीन तीर्थस्थल है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बगीचों से परे स्थित है ये मंदिर, मंडप और पवित्र कुंडो के साथ हरियाली युक्त प्राकृतिक दृश्य इसे आनंददायक स्थल बनाता है। दीवान कृपाराम द्वारा निर्मित उच्चतम चोटी के शिखर पर बना सूर्य देवता का छोटा मंदिर शहर के सारे स्थानों से दिखाई पड़ता है। गलताजी मन्दिर का विहंगम दृष्य मन्दिर का निचला कुण्ड गलताजी मंदिर जयपुर से केवल 10 किमी दूर स्थित है। जयपुर के आभूषणों में से एक, मंदिर परिसर में प्राकृतिक ताजा पानी का झरना और 7 पवित्र कुण्ड शामिल हैं। इन कुण्डों के बीच, गलता कुंड', पवित्रतम है और सूखी कभी नहीं माना जाता है। शुद्ध पानी की एक वसंत 'गौमुख', एक रॉक, एक गाय के सिर की तरह आकार टैंक में से बहती है। एक शानदार संरचना, इस भव्य मंदिर, गुलाबी बलुआ पत्थर में बनाया गया है कम पहाड़ियों के बीच, और अधिक एक महल या 'हवेली' एक पारंपरिक मंदिर से की तरह लग रहे करने के लिए संरचित है। गलता  बंदर मंदिर हर पेड़-पौधों की विशेषता भव्य परिदृश्य को आपस में जोड़ देता है, और जयपुर शहर का एक...